Monday, November 12, 2018

2019 के आम चुनाव को क्यों चुनौती मान रहे हैं फ़ेसबुक

फ़ेक न्यूज़ के मुद्दे पर दिल्ली में बीबीसी के कार्यक्रम में फ़ेसबुक, गूगल और ट्विटर के प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि फ़ेक न्यूज़ भारत में एक गंभीर समस्या है और उनकी कंपनियां इससे निपटने का प्रयास कर रही हैं.

आईआईटी दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम में फ़ेसबुक की ओर से मनीष खंडूरी, गूगल की ओर से ईरीन जे ल्यू और ट्विटर की ओर से विजया गाड्डे ने हिस्सा लिया और तकनीकी कंपनियों के सामने फ़ेक न्यूज़ को रोकने की चुनौतियों पर चर्चा की.

फ़ेक न्यूज़ की समस्या पर फ़ेसबुक से जुड़े मनीष खंडूरी ने कहा, "ये हमारे प्लेटफार्म के अस्तित्व के लिए ही एक ख़तरा है और हम इसे बहुत गंभीरता से ले रहे हैं. एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म के तौर पर हम संवाद की गुणवत्ता पर केंद्रित हैं और ग़लत जानकारियां इसे प्रभावित करती हैं. हम एक सोशल मीडिया प्लेटफ़ार्म हैं और समाज में सार्थक दख़ल देना चाहते हैं. ग़लत जानकारियां इसके ठीक उलट हैं."

गूगल की दक्षिण एशिया में न्यूज़लैब प्रमुख इरीन जे ल्यू ने कहा, "गूगल इसे एक बड़ी समस्या के तौर पर स्वीकार करती है और इसका समाधान खोजने में अपनी ज़िम्मेदारी को समझती है. जब लोग गूगल पर आते हैं तो वो जवाबों की उम्मीद करते हैं. हम अपनी तकनीक की मदद से और पत्रकारों और अन्य के साथ साझेदारियां करके उच्च गुणवत्ता वाला कंटेंट उपलब्ध करवा सकते हैं."

ट्विटर की ट्रस्ट और सेफ़्टी (विश्वास और सुरक्षा) की ग्लोबल हेड विजया गाड्डे ने कहा, "ट्विटर का उद्देश्य जन संवाद को बढ़ाना है. जब लोग ट्विटर पर आते हैं तो वो जानना चाहते हैं कि क्या चल रहा है और वो इस बारे में दुनिया को भी बताना चाहते हैं. अगर हम उन्हें उच्च गुणवत्ता का कंटेंट मुहैया नहीं कराएंगे तो वो हमारे प्लेटफ़ार्म का इस्तेमाल ही बंद कर देंगे. इसलिए हमारे लिए इस तरह की ख़बरों के प्रभाव को स्वीकार करना बेहद महत्वपूर्ण है."

अमरीकी चुनावों के दौरान फ़ेसबुक की ओर से हुई ग़लतियों को स्वीकार करते हुए मनीष खंडूरी ने कहा, "हमने अपनी ग़लतियां स्वीकार की हैं. जहां तक साल 2016 के अमरीकी चुनावों का सवाल हैं, हमने अपनी ग़लतियों को स्वीकार किया है और इनसे काफ़ी सीखा है. एक प्लेटफ़ार्म के तौर पर फ़ेसबुक समाधान का हिस्सा बनना चाहता है. हम अपने प्लेटफ़ार्म पर उपलब्ध सामग्री की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना चाहते हैं."

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सोशल मीडिया से उम्मीदें
जब मनीष खंडूरी से पूछा गया कि अमरीकी चुनाव में दख़ल के सवाल का जवाब देने के लिए फ़ेसबुक संस्थापक मार्क ज़करबर्ग को अमरीकी सदन के सामने पेश होना पड़ा था, लेकिन भारत में हुई लिंचिंग की घटनाओं पर उन्होंने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, इस पर खंडूरी ने कहा, "भारत में जो हो रहा है, उसमें मार्क ज़करबर्ग की रुचि है और उन्होंने इस मुद्दे के समाधान के लिए एक बड़ी टीम बनाई है. वो चुनावों को ध्यान में रखते हुए वॉशिंगटन डीसी में एक इलेक्शन वॉर रूम भी बना रहे हैं."

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