Tuesday, November 27, 2018

भारतीय स्टार्टअप ने बनाई ऐसी डिवाइस बनाई जो प्रदूषण करेगी कम,

मैकलेक टेक्निकल प्रोजेक्ट लैबोरेटरी नाम के भारतीय स्टार्टअप ने एक ऐसी डिवाइस बनाई है, जो ना सिर्फ हवा को साफ करेगी, बल्कि इससे बिजली भी बनेगी। मैकलेक वायु-1 नाम की इस डिवाइस को मैट की तरह सड़क पर बिछाया जाता है। उस पर गाड़ियां गुजरने से जो दबाव बनता है, उसी से हवा साफ होती है और बिजली बनती है। चार साल पुरानी मैकलेक के संस्थापक भाइयों नारायण और बलराम भारद्वाज ने बताया कि 3.75 मीटर चौड़ी सिंगल लेन वाली एक किलोमीटर सड़क पर इस डिवाइस को लगाया जाए, तो बहुत कम ट्रैफिक होने पर भी रोजाना 20,000 यूनिट बिजली बन सकती है। यह 156 करोड़ लीटर हवा को भी साफ करेगी

अगले साल जून में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
एक घंटे में पैदा होगी जरूरत से 4 गुना ज्यादा बिजली
यह टेक्नोलॉजी एयर मैनेजमेंट कैटेगरी में स्वच्छ भारत ग्रैंड प्रोग्राम की विनर हो चुकी और अभी परीक्षण से गुजर रही है।
इस तकनीक को दिल्ली की पूरी सड़कों पर लगाने पर केवल एक घंटे में यह दिल्ली वासियों के एक दिन में इस्तेमाल होने वाली बिजली से 4 गुना ज्यादा इलेक्ट्रिसिटी पैदा कर सकती है।
नारायण ने बताया कि अगले साल जून में दिल्ली की एक किलोमीटर सड़क पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शुरू किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट में आईआईटी रुड़की भी मैकलेक के साथ है। कंपनी ने पिछले साल इस तकनीक का पेटेंट करवाया है।
सड़क के ऊपर बिछाने के कारण 10 साल तक सड़क के मेंटिनेंस की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
3 साल में निकल आएगी लागत
डिवाइस को मैट की तरह सड़क पर बिछाया जाएगा। यह 150 टन तक लोड सह सकती है।
3.75 मीटर चौड़ा, एक किलोमीटर तक मैट बिछाने पर 3 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।
एक किमी मैट पर रोजाना 50,000 वाहन गुजरने से 20 हजार यूनिट बिजली पैदा होगी।
एक दिन में 156 करोड़ लीटर हवा साफ हो सकती है। हवा 98% तक शुद्ध होगी।
डिवाइस 10-15 साल तक चलेगी। इससे बनने वाली बिजली से 3 साल में खर्च निकल आएगा।
इसे बनाने में घरेलू टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है। इसे रिसाइकिल भी किया जा सकेगा।
प्रदूषण फैलाने वाले पीएम 2.5 को भी साफ करेगी
इस डिवाइस में पहले हवा को कंप्रेस किया जाता है, फिर उसे 6 फिल्टर से गुजारा जाता है। इसके बाद डिवाइस साफ हवा वातावरण में छोड़ देती है। यह प्रदूषण फैलाने वाले पीएम 2.5 को भी सोख लेती है। हालांकि, फिल्टर की नियमित सफाई भी करनी पड़ेगी। इस तरह हर एक किमी के इंस्टालेशन पर 12 लोगों को प्रत्यक्ष और 20 लोगों को परोक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा।

सड़क से बिजली बनाने पर कई देशों में हो रहा काम
सड़क पर चलने वाले वाहनों से बिजली बनाने के प्रोजेक्ट पर दुनिया में कई जगह काम हो रहा है। अमेरिका और इंग्लैंड में भी इसे लेकर परीक्षण किए जा रहे हैं। कैलिफोर्निया एनर्जी कमीशन ने दो साल पहले इसका अध्ययन शुरू किया था। हालांकि अभी तक दुनिया में कहीं भी इस तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू नहीं हो सका है।

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